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पितृ दोष पूजा मुहूर्त 2026

by Pandit Anoopanand Shastri

पितृ दोष पूजा मुहूर्त 2025

पितृ दोष पूजा मुहूर्त 2026 – संपूर्ण जानकारी

हिंदू धर्म में पितृ दोष (Pitra Dosh) को एक गंभीर ज्योतिषीय दोष माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि जब व्यक्ति अपने पूर्वजों के प्रति कर्तव्यों का पालन नहीं करता या उनकी आत्मा असंतुष्ट रहती है, तब उसकी कुंडली में पितृ दोष उत्पन्न होता है। इसका असर जीवन के विभिन्न पहलुओं पर दिखाई देता है – जैसे विवाह में बाधा, संतान सुख में विलंब, आर्थिक कठिनाइयाँ और पारिवारिक अशांति। इसलिए, पितृ दोष निवारण के लिए विधिपूर्वक पितृ दोष पूजा करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।

वर्ष 2026 में पितृ दोष पूजा के लिए कौन से शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं, कौन-सी विधि का पालन करना चाहिए, और इसके क्या लाभ होते हैं – इस ब्लॉग में हम विस्तृत रूप से समझेंगे।


पितृ दोष पूजा का महत्व

पितृ दोष पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है बल्कि यह पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किया जाने वाला पुण्यकर्म है। इस पूजा से व्यक्ति अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करता है। साथ ही, इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और ग्रह दोषों का प्रभाव कम होता है।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, पितृ दोष पूजा करने से:

  • विवाह और संतान सुख की बाधाएँ दूर होती हैं।

  • परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

  • पितरों की आत्मा तृप्त होकर आशीर्वाद देती है।

  • अकाल मृत्यु और अचानक दुर्घटनाओं का भय कम होता है।


पितृ दोष पूजा मुहूर्त 2026

पितृ दोष पूजा करने के लिए पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) और कुछ विशेष तिथियाँ सबसे शुभ मानी जाती हैं। वर्ष 2026 में पितृ दोष पूजा के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:

1. पितृ पक्ष 2026

  • प्रारंभ तिथि: 7 सितंबर 2026 (रविवार, पूर्णिमा श्राद्ध)

  • समाप्ति तिथि: 21 सितंबर 2026 (रविवार, सर्वपितृ अमावस्या)

इस अवधि के दौरान श्राद्ध, तर्पण और पितृ दोष पूजा का विशेष महत्व होता है। सर्वपितृ अमावस्या के दिन विशेष रूप से पितृ दोष निवारण हेतु पूजा की जाती है।

2. अमावस्या तिथियाँ (विशेष)

अमावस्या को पितृ पूजा का विशेष महत्व होता है। 2026 में कुछ प्रमुख अमावस्या तिथियाँ:

  • 29 जनवरी 2026 – माघ अमावस्या

  • 27 मार्च 2026 – चैत्र अमावस्या

  • 25 अप्रैल 2026 – वैशाख अमावस्या

  • 23 मई 2026 – ज्येष्ठ अमावस्या

  • 21 जून 2026 – आषाढ़ अमावस्या

  • 21 जुलाई 2026 – श्रावण अमावस्या

  • 19 अगस्त 2026 – भाद्रपद अमावस्या

  • 21 सितंबर 2026 – सर्वपितृ अमावस्या (सबसे महत्वपूर्ण)

  • 20 अक्टूबर 2026 – अश्विन अमावस्या

  • 19 नवंबर 2026 – कार्तिक अमावस्या

  • 19 दिसंबर 2026 – मार्गशीर्ष अमावस्या

3. सोमवती अमावस्या 2026

जब अमावस्या सोमवार को आती है, तब उसका महत्व और बढ़ जाता है। यह तिथि पितृ दोष पूजा के लिए अत्यंत शुभ होती है।

  • 29 सितंबर 2026 – सोमवती अमावस्या


पितृ दोष पूजा मुहूर्त 2026

जनवरी 20261/2/4/5/6/8/9/10/11/12/13/16/18/19/20/22/23/25/26/27/29/30.
फरवरी 20261/2/3/5/6/8/9/10/12/13/15/16/17/20/22/23/24/26/ [महाशिवरात्रि] 27.
मार्च 20261/2/3/6/8/9/10/12/13/14/15/16/17/19/20/22/23/24/25/27/29/30/31.
अप्रैल 20263/5/6/7/8/10/12/13/14/16/17/19/20/21/24/26/27/30.
मई 20261/3/4/5/8/10/11/12/15/16/17/18/19/20/22/23/24/25/26/29/31.
जून 20261/2/4/5/ 7/8/9/11/12/14/15/16/19/21/22/23/25/26/28/29/30.
जुलाई 20261/5/6//7/9/10/12/13/14/17/19/20/21/23/24/26/27/28/31.
अगस्त 20262/3/4/6/7/9/10/11/14/16/17/18/19/21/23/24/25/27/28/30.
सितंबर 20261/3/4/6/7 से पितृपक्ष 21 तक प्रतिदिन मुहूर्त / 22/25/27/28/29.
अक्टूबर 20261/2/4/5/6/7/9/11/12/13/16/18/19/20/21/23/25/26/27/30.
नवंबर 20261/2/3/5/6//8/9/10/12/13/15/16/17/19/20/22/23/24/27/29/30.
दिसंबर 2026 1/3/4/6/7/8/11/13/14/15/18/19/20/21/22/25/27/28/29/30/31.

पितृ दोष पूजा विधि

पितृ दोष पूजा को विधिपूर्वक करने के लिए पंडित जी की सहायता लेना आवश्यक होता है। सामान्यतः पूजा की विधि इस प्रकार होती है:

  1. पवित्र स्थान पर स्नान करके संकल्प लें।

  2. कुशा, तिल और जल से तर्पण करें।

  3. पितरों के नाम से पिंडदान करें।

  4. विशेष मंत्रोच्चारण और हवन किया जाता है।

  5. ब्राह्मणों को भोजन और दान दें।


पितृ दोष पूजा की लागत (Cost)

पितृ दोष पूजा की लागत कई कारकों पर निर्भर करती है – जैसे स्थान, पंडित, पूजा की विधि और सामग्री। सामान्यतः इसकी लागत:

  • 8,000 से 21,000 रुपये (साधारण पूजा)

  • 25,000 से 51,000 रुपये (विशेष पूजा और हवन सहित)


पितृ दोष पूजा के लाभ

इस पूजा से व्यक्ति को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं, जैसे:

  • पूर्वजों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद।

  • परिवार में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य।

  • वैवाहिक जीवन की समस्याओं से मुक्ति।

  • संतान सुख की प्राप्ति।

  • आर्थिक समृद्धि और बाधाओं का निवारण।


पितृ दोष पूजा के प्रभाव

यदि समय पर यह पूजा नहीं की जाती तो जीवन में अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। जबकि विधिवत पूजा करने से:

  • नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

  • जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।

  • ग्रहों का दोष कम होता है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: पितृ दोष पूजा कहाँ करनी चाहिए?

उत्तर: यह पूजा विशेष रूप से त्र्यंबकेश्वर (नाशिक) में अत्यंत शुभ मानी जाती है।

प्रश्न 2: पितृ दोष पूजा कब करनी चाहिए?

उत्तर: पितृ पक्ष, अमावस्या या सोमवती अमावस्या को करना सबसे शुभ होता है।

प्रश्न 3: क्या पितृ दोष पूजा घर पर की जा सकती है?

उत्तर: हाँ, लेकिन इसके लिए योग्य पंडित की उपस्थिति आवश्यक होती है।

प्रश्न 4: पितृ दोष पूजा में क्या सामग्री लगती है?

उत्तर: कुशा, तिल, जल, पिंड (चावल और तिल से बने), घी, धूप, हवन सामग्री, फल, वस्त्र और दान सामग्री।

प्रश्न 5: पितृ दोष पूजा से तुरंत फल मिलता है क्या?

उत्तर: इसका फल धीरे-धीरे जीवन में सकारात्मक बदलावों के रूप में दिखने लगता है।


निष्कर्ष

पितृ दोष पूजा एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, जो न केवल पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए आवश्यक है, बल्कि वर्तमान जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए भी किया जाता है। वर्ष 2026 में पितृ पक्ष और अमावस्या की तिथियाँ इस पूजा के लिए सर्वोत्तम अवसर प्रदान करती हैं। यदि आपकी कुंडली में पितृ दोष है, तो इन मुहूर्तों पर विधिपूर्वक पूजा अवश्य करें।

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